Wednesday, July 14, 2010

बडी धूम धाम से निकली भगवान जगन्नाथ शोभायात्रा











(पिंकी उपाध्याय)
सिवनी। प्रदेश के दूसरे और नगर को पहले जगन्नाथ मंदिर की अमूल्य धरोहर का सौभाग्य सिवनी शहर को प्रदत्त है।प्रतिवर्ष आषाढ़ माह की द्वितीया को स्वामी जगन्नाथ की शोभायात्रा यहां पुरातन काल से यहां आयोजित होती आई है अपने आप में अदभुत और इच्छा, मन, फलदायिनी इस शोभायात्रा में जगन्नाथ के भात को जगत पसारे हाथ की गंूज नगर की हर साल हर गली में यहां गुंजित होती है समाज के हर छोटे वर्ग समूह के लोग और धर्मप्रेमीजन जगन्नाथ स्वामी के इस समारोह में शरीक होते हैं।
बिना सहयोग के बना मंदिर
नगर के सुभाष वार्ड स्थित जगन्नाथ स्वामी जी के मंदिर का निर्माण स्व. सेठ भोपतराव जी पवार द्वारा सन १९१४ में (विक्रम संवत १९७१) में बिना किसी के सहयोग से कराया गया था नगर में प्रचलित किवदंती के मुताबिक जगन्नाथ मंदिर के निर्माता भोपतराव को स्वप्र में जगन्नाथ जी ने दर्शन देकर इस प्रतिमा स्थापना का उनसे संकल्प लिया था भगवान जगन्नाथ के साक्षात दर्शन से प्रफुल्लित भोपतराव ने उन दिनों बिना किसी से सहयोग लिये इस मंदिर का निर्माण कराया मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित जगन्नाथ स्वामी की मनोहारी प्रतिमा आज भी नगर और समीपवर्ती लोगों के लिये पूज्यनीय बनी हुई हैं मंदिर के कलश, साज सज्जा और उसके कंगूरे आज भी भोपतराव के भगवत प्रेम को बयां करते हैं।
जगन्नाथ पुरी से आई मूर्तियां
मंदिर के निर्माण के बाद स्थापना के लिये स्वामी जगन्नाथ भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाएं उन दिनों जगन्नाथ् पुरी से ही लाई गई थी जगन्नाथ मंदिर की प्रतिमाओं की वास्तुकला को इन प्रतिमाओं में हूबहू निखारा गया है नगर के इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि सवा माह की लगातार विशेष पूजन अर्चना के बाद भगवान की इन प्रतिमाओं की यहां प्राण प्रतिष्ठा संभव हो पाई थी उनकी इसी परम्परा का निर्वाह करते हुये इस परिवार की पांचवी पीढ़ी के सुनीलराव पवार के आहृान पर आज भी लोकप्रिय बनी हुई हैं हर वर्ष इसका बड़ा खर्च भी उनके परिजन स्वयं उठाते हैं।
९७ वर्ष में पहँुची रथयात्रा
सिवनी में जज के रूप में सेवारत भोपतराव द्वारा शुरू की जगन्नाथ की रथयात्रा ९७ वर्षाे से अनवरत चली आ रही हैं भोपतराव के बाद उनके पुत्र सेठ रामराव, गोपालराव और जगन्नाथराव के बाद भगवान जगन्नाथ की सेवा का भार सुनीलराव पवार पर हैं और वे इसका निर्वहन भी पूरी क्षमता से कर रहे हैं सुनीलराव अपने परदादा के बारे में एक कहावत यह भी चरितार्थ है कि १९५४ में उनके परदादा भोपतराव की मृत्यु के वक्त मंदिर के समीप लगा नीम का दरकश वृक्ष अपने आप टूट गया और मंदिर में लगे चारों ताले अपने आप खुल गये थे।
जगत पसारे हाथ
जगन्नाथ स्वामी के प्रसाद के रूप में भक्तों को दाल भात बहुत प्रिय है यही वजह है कि आज भी महाप्रसाद के रूप में केवल भात ही बांटा जाता है प्रसाद को पाने के लिये हजारो लोगों की जो भीड़ उमड़ती है वह हाथ पसारे जगन्नाथ के भात को जगत पसारे हाथ की कहावत को गुंजित करते हैं।
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को प्रतिवर्ष निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा नगर के प्राचीन व एकमात्र जगदीश मंदिर से मंगलवार को भव्य रूप से निकाली गई भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भाई बलभद्र की इस शोभायात्रा को भव्य रूप देने के लिये व्यापक तैयारियां की गई थी इस रथयात्रा को नगर के परम्परागत प्रमुख मार्गाे से भ्रमण कराते हुये बैनगंगा के पावन तट लखनवाड़ा ले जाया गया इसके पूर्व यह यात्रा चित्रगुप्त, महावीर टॉकीज, सुनारी मोहल्ला, शुक्रवारी राम मंदिर, काली चौक से बरघाट रोड होते हुये विंध्यवासिनी मंदिर से गणेश चौक और वहां से जैन मंदिर के सामने से पुन: शुक्रवारी और यहां से नेहरू रोड पहँुची दुर्गा चौक, मठ मंदिर, छिंदवाड़ा चौक होते हुये शोभायात्रा बैनगंगा तट लखनवाड़ा पहँुची यहां भगवान की श्रद्धा भाव से पूजार्चना की गई।
हुई पूजा अर्चना
शोभायात्रा निकलने के पूर्व जगदीश मंदिर में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने रीति-रिवाज के अनुसार पूजन पाठ किया वही शाम तक यहां भजन कीर्तन और आरती की गई रैली में श्रद्धालुओं ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया वहीं जगह-जगह इस भव्य शोभायात्रा का नागरिकों ने स्वागत व पूजनपाठ कर प्रसाद वितरण किया।

Sunday, July 11, 2010

शिक्षण संस्थान सुविधा विहीन (पिंकी उपाध्याय)



नही मिल रही बच्चों को बेहतर शिक्षा व संस्कार
उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली द्वारा दिये गये निर्देशों का नही हो पा रहा पालन


सिवनी । निजी स्कूल संचालक पालकों को कितनी ही सुविधायें देने का वादा सत्र प्रारंभ होने से पूर्व देते हों लेकिन स्थिति इसके विपरीत होती है। शिक्षा विभाग के स्पष्ट एवं कड़े निर्देशों के बावजूद भी निजी शिक्षण संस्थान उन शर्तों को पूरा नहीं करते। ९० प्रतिशत निजी व प्राइमरी स्कूल नियमों को लगभग ताँक में रखते हुये मान्यता हासिल कर लेते हैँ वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग का भारी भरकम अमला भी इस मामले में चुप्पी साधे रखता है लगभग 50 प्रतिशत स्कूल भाड़े का मकान लेकर लगाये जाते हैं इन मकानों में ना ही कोई पर्याप्त खेल मैदान होता है और ना ही आवागमन की सुविधा। पढने वाले बच्चे खेल कूद में पूरी तरह पिछड़ जाते हैं दाखिले के समय अभिभावकों को तरह तरह के प्रलोभन देकर फँसा लिया जाता है लाइब्रेरी खेल कूद मैदान, खुला वातावरण, प्रयोग शाला, शौचालय, पीने के पानी की व्यवस्था का पूर्ण रूप से अभाव रहता है। अनेक स्कूलों में अध्यापन का समय भी निर्धारित नहीं है सप्ताह के कुछ दिन प्रात: स्कूल लगते हैं तो कभी दोपहर में जिस वजह से कई बच्चे नियमित रूप से अध्यापन कार्य नहीं कर पाते कई स्कूल सप्ताह के कुछ दिन ही खुलते हैं अभिभावकों के निवेदन के पश्चात् भी इन स्कूलों में कोई सुनवाई नहीं होती उल्टा उन्हें यह कह दिया जाता है कि अपने बच्चे का दाखिला किसी फकीर सरकारी स्कूलों में करवा दो इन सबके बावजूद भी स्कूल संचालक अभिभावकों से फीस के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं। इन सब मामलों में बनाई गई जाँच समिति भी ले देकर शर्तें पूरी ना कर पाने वाली शिक्षण संस्थाओं पर कोई अंकुश नहीं लगा पाती हैं।
नगर में पिछले कुछ वर्षाे में प्रायवेट स्कूलों की बाढ़ सी आ गई हैं। शहर के लगभग हर इलाके में निजी स्कूल संचालित हैं। वहीं बेहतर शिक्षा पाने के ललक व आगे दिखने की होड़ में अभिभावक अपने बच्चों को इन स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या भी बढ़ी हैंन केजी वन से लेकर हाईस्कूल तक की कक्षाओं वाले स्कूलों की संख्या इनमें अधिक हैं किंतु नगर में अनेक प्रायवेट स्कूल संचालित हैं, जो शासन द्वारा निर्धारित नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं।
इन स्कूलों में छात्रों के खेलने के लिए ग्राउंड भी नहीं हैं और फीस के लालच में छोटे-छोटे कमरों में क्षमता से अधिक विद्यार्थी बिठाये जाते हैं स्कूल संचालकों द्वारा छात्र-छात्राओं के अभिभावकों से मोटी फीस वसूली जाती हैं वहीं सत्र प्रारंभ होने पर उन्हें निर्देशित किया जाता हैं कि वे उनकी बताई दुकानों से ही कापी किताबें व यूनिफार्म खरीदें। इन दुकनों से स्कूल संचालक अपना कमीशन भी वसूलते हैं इन स्कूल संचालकों द्वारा कम वेतन पर शिक्षक-शिक्षिकाएं रखते हैं जो स्कूल में विद्यार्थियों को सही तरीके से पढ़ाई नहीं करवाते और अपने पास ट्यूशन पढऩे के लिए मजबूर करते हैं इसीलिये छोटी-छोटी कक्षाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं को भी ट्यूशन जाना पड़ता हैं।
इससे अभिभावकों पर बच्चों की पढ़ाई का अतिरिक्त भार पड़ता हैं। स्कूलों में मैदान का अभाव होने से यहां खेलकूद इत्यादि भी नहीं होते इससे छात्र-छात्राएं खेलकूद की गतिविधियों से वंचित रह जाते हैं इन स्कूलों में कोई रचनात्मक कार्य व प्रतियोगिता भी आयोजित नहीं की जाती, जिससे छात्र-छात्राओं में प्रतिस्पर्धा की भावना का भी विकास नहीं होता। छात्र-छात्राएं जैसे तैसे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
नही मिल रही बच्चों को बेहतर शिक्षा व संस्कार
उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली द्वारा दिये गये निर्देशों का नही हो पा रहा पालन
सिवनी । निजी स्कूल संचालक पालकों को कितनी ही सुविधायें देने का वादा सत्र प्रारंभ होने से पूर्व देते हों लेकिन स्थिति इसके विपरीत होती है। शिक्षा विभाग के स्पष्ट एवं कड़े निर्देशों के बावजूद भी निजी शिक्षण संस्थान उन शर्तों को पूरा नहीं करते। ९० प्रतिशत निजी व प्राइमरी स्कूल नियमों को लगभग ताँक में रखते हुये मान्यता हासिल कर लेते हैँ वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग का भारी भरकम अमला भी इस मामले में चुप्पी साधे रखता है लगभग 50 प्रतिशत स्कूल भाड़े का मकान लेकर लगाये जाते हैं इन मकानों में ना ही कोई पर्याप्त खेल मैदान होता है और ना ही आवागमन की सुविधा। पढने वाले बच्चे खेल कूद में पूरी तरह पिछड़ जाते हैं दाखिले के समय अभिभावकों को तरह तरह के प्रलोभन देकर फँसा लिया जाता है लाइब्रेरी खेल कूद मैदान, खुला वातावरण, प्रयोग शाला, शौचालय, पीने के पानी की व्यवस्था का पूर्ण रूप से अभाव रहता है। अनेक स्कूलों में अध्यापन का समय भी निर्धारित नहीं है सप्ताह के कुछ दिन प्रात: स्कूल लगते हैं तो कभी दोपहर में जिस वजह से कई बच्चे नियमित रूप से अध्यापन कार्य नहीं कर पाते कई स्कूल सप्ताह के कुछ दिन ही खुलते हैं अभिभावकों के निवेदन के पश्चात् भी इन स्कूलों में कोई सुनवाई नहीं होती उल्टा उन्हें यह कह दिया जाता है कि अपने बच्चे का दाखिला किसी फकीर सरकारी स्कूलों में करवा दो इन सबके बावजूद भी स्कूल संचालक अभिभावकों से फीस के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं। इन सब मामलों में बनाई गई जाँच समिति भी ले देकर शर्तें पूरी ना कर पाने वाली शिक्षण संस्थाओं पर कोई अंकुश नहीं लगा पाती हैं।
नगर में पिछले कुछ वर्षाे में प्रायवेट स्कूलों की बाढ़ सी आ गई हैं। शहर के लगभग हर इलाके में निजी स्कूल संचालित हैं। वहीं बेहतर शिक्षा पाने के ललक व आगे दिखने की होड़ में अभिभावक अपने बच्चों को इन स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या भी बढ़ी हैंन केजी वन से लेकर हाईस्कूल तक की कक्षाओं वाले स्कूलों की संख्या इनमें अधिक हैं किंतु नगर में अनेक प्रायवेट स्कूल संचालित हैं, जो शासन द्वारा निर्धारित नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं।
इन स्कूलों में छात्रों के खेलने के लिए ग्राउंड भी नहीं हैं और फीस के लालच में छोटे-छोटे कमरों में क्षमता से अधिक विद्यार्थी बिठाये जाते हैं स्कूल संचालकों द्वारा छात्र-छात्राओं के अभिभावकों से मोटी फीस वसूली जाती हैं वहीं सत्र प्रारंभ होने पर उन्हें निर्देशित किया जाता हैं कि वे उनकी बताई दुकानों से ही कापी किताबें व यूनिफार्म खरीदें। इन दुकनों से स्कूल संचालक अपना कमीशन भी वसूलते हैं इन स्कूल संचालकों द्वारा कम वेतन पर शिक्षक-शिक्षिकाएं रखते हैं जो स्कूल में विद्यार्थियों को सही तरीके से पढ़ाई नहीं करवाते और अपने पास ट्यूशन पढऩे के लिए मजबूर करते हैं इसीलिये छोटी-छोटी कक्षाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं को भी ट्यूशन जाना पड़ता हैं।
इससे अभिभावकों पर बच्चों की पढ़ाई का अतिरिक्त भार पड़ता हैं। स्कूलों में मैदान का अभाव होने से यहां खेलकूद इत्यादि भी नहीं होते इससे छात्र-छात्राएं खेलकूद की गतिविधियों से वंचित रह जाते हैं इन स्कूलों में कोई रचनात्मक कार्य व प्रतियोगिता भी आयोजित नहीं की जाती, जिससे छात्र-छात्राओं में प्रतिस्पर्धा की भावना का भी विकास नहीं होता। छात्र-छात्राएं जैसे तैसे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

महानगरों के बाद अब सिवनी भी ड्रग्स की चपेट में














(पिंकी उपाध्याय)





सिवनी के युवाओं का भविष्य खतरे में

जिसने एक बार यह किया वो ही बन जाता है बिक्री एजेंट




सिवनी। नगर में इन दिनों एक कश के जुगाड़ में नवयुवक सुबह से शाम और शाम से रात तक इधर से उधर और कुछ भी करने को तैयार खड़े है कारण सिर्फ इतना है कि यह कश जो एक बार पी लेता है वह उसका आदी हो जाता है और फिर उसका एजेंट बन जाता है क्योंकि यह कश 100 से 1000 और 1000 से 10,000 तक का भी हो सकता होता है। जी हॉं यह वही नशा है जिसे महानगरों में ड्रग्स के नाम से जाना जाता है जिसमें कोकीन,हेरोइन ,ब्राउन शुगर की मात्रा होती है जिसकी मात्रा के हिसाब से पुडिय़ा की कीमत तय होती है किंतु अब यह नशा अपने पांव पसार चुका है।





माफिया की तर्ज पर फैला है कारोबार

अब सवाल यह उठता है कि शहर में ड्रग्स का विक्रय कैसे होता है शहर के कुख्यात निचले तबके के लोगों द्वारा पहले तो युवाओं को इसका आदी बनाया जाता है उसके बाद जब वह युवा इसका आदी हो जाता है तो उसे ही एजेंट के रूप में प्रयोग में लाया जाता है इसका कारोबार सिवनी से नागपुर तक आर्गनाईज क्राइम के रूप में विकसित है जिसे हमने तो समझ लिया लेकिन प्रशासन क्यों नही समझ रहा है।





ड्रग्स के सबंध में पुलिस प्रशासन के मुख से
इस संबंध में सिवनी थाना कोतवाली मे जानकारी देने पर थाने में उपस्थित एएसआई एम.पी.तिवारी द्वारा बताया गया कि सर्वप्रथम पुडिय़ा को जांच हेतु भेजा जायेगा अगर उसमें कोई नशीले पदार्थ की पुष्टि होगी तभी प्रक्रिया आगे बढ पायेगी। क्योंकि एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोपी को आजीवन कारावास तक का प्रावधान है एवं प्रकरण की पुष्टि न होने पर हमें खामियाजा भुगतना पड़ता है। इसी विषय पर वर्तमान कोतवाली प्रभारी सब इंस्पेक्टर विजय तिवारी से बात करने पर उन्होनें कहा कि हमें जो टे्रनिग मिली है उसके अनुसार ब्राउन शुगर सफेद दानेदार पाउडर होता है यह मटमैला पाउडर ब्राउन शुगर है कि नहीं मै नही बता सकता किंतु इस मामले में जांच कर हम आवश्यक कार्यवाही जरूर करेगें ।





सिवनी की वर्तमान स्थिति
अगर आज शहर में पुडिया पीने वालों की गणना की जाएं तो यह संख्या हजार के ऊपर होगी जिसमें नगर के संभ्रात परिवारों से लेकर एक गरीब मजदूर भी शामिल है अगर प्रशासनिक जांच की यही रफ्तार रही तो इस नशे के आदी नगर के युवाओं की संख्या कई गुना बढ जायेगी अगर जल्दी प्रशासन इस विषय में नही जागा तो हर दूसरे घर में इस नशे का आदी एक व्यक्ति होगा और यह नशा ऐसा है कि परिवार का एक सदस्य अगर इसका आदी हो तो पूरा परिवार इसकी सजा भुगतता है।

Saturday, July 10, 2010

विनोद शर्मा फुटबाल के राष्ट्रीय निर्णायक घोषित



अखिल भारतीय फुटबाल संघ ने राष्ट्रीय फुटबाल निर्णायकों की घोषणा कर दी है, जिसमें सिवनी जिले से श्री विनोद शर्मा को फुटबाल का राष्ट्रीय निर्णायक घोषित किया गया है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश से मात्र दो राष्ट्रीय फुटबाल निर्णायक घोषित किये गये है, जिनमें भोपाल से तनवर तथा सिवनी जिले से श्री विनोद शर्मा सफल हुए है। उल्लेखनीय है कि अभी हाल ही में कलकत्ता में आयोजित रैफरी फिटनेस टेस्ट का आयोजन अखिल भारतीय फुटबाल संघ द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें विनोद शर्मा शामिल हुए थे। इस उपलब्धि पर जिला फुटबाल संघ के समस्त पदाधिकारियों ने विनोद शर्मा को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की है।

राष्ट्रीय संतोष ट्राफी में भाग लेने के लिए मध्यप्रदेश टीम के कोचिंग कैम्प के लिए विकास चौहान का चयन




राष्ट्रीय संतोष ट्राफी फुटबाल ट्राफी में भाग लेने के लिए मध्यप्रदेश टीम का चयन स्पर्धा दिनांक 6 जुलाई 2010 से 8 जुलाई 2010 तक देवास में सम्पन्न हुई। इस चयन स्पर्धा में सम्मलित होने के लिए जिला फुटबाल संघ सिवनी द्वारा शेख अख्तर एवं विकास चौहान को भेजा गया था, जिसमें कोचिंग कैम्प के लिए विकास चौहान का चयन 26 खिलाडिय़ों में किया गया। कोचिंग कैम्प के उपरांत मध्यप्रदेश की टीम का चयन किया जाकर 17 जुलाई को मध्यप्रदेश की टीम राष्ट्रीय संतोष ट्राफी फुटबाल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कलकत्ता प्रस्थान करेंगी।

Tuesday, July 6, 2010

आज भी जारी है नगर में विस्फोटको का भारी मात्रा में संग्रहण








एक चिंगारी ही पूरे क्षेत्र को तहस नहस करने के लिये काफी



(पिंकी उपाध्याय)






सिवनी-:सिवनी के नगरीय रहवासी क्षेत्र के अंतर्गत महावीर मढिय़ा के समीप और स्टेशन मार्ग के इलाके में स्थित माचिस के बड़े-बड़े गोदाम आमजनता के लिये जोखिम भरे हो गये है इन गोदामों में हर हफ्ते बड़ी मात्रा में माचिसों का संग्रह कभी भी हादसों को जन्म दे सकता हैं नगर में इसके पूर्व भी यही गलती गंभीर दुर्घटना का रूप ले चुकी हैं इसके पूर्व मंगलीपेठ में हुये विस्फोट की यादे आज भी भयभीत कर देती हैं इसी प्रकार टिग्गा मोहल्ले में हुये विस्फोट से तो पूरी ईमारत ही धाराशाही हो गई थी इस विषय में पुलिस प्रशासन को तत्काल कोई कार्यवाही करनी पडेंग़ी नहीं तो फिर से कोई नया हादसा जन्म लेगा क्योंकि अत्याधिक मात्रा में बारूद से भरे गोदामो को भड़काने में एक ही चिंगारी काफी होती है बिना किसी सूचना और मंजूरी के ये गोदाम रहवासी क्षेत्र में स्थित है ऐसे गोदामों को शहर से बाहर किसी सुरक्षित स्थानों में होना चाहिये।
विगत दिवस इसी लापरवाही के चलते बुधवारी बाजार में स्थित एक प्लास्टिक दुकान में आग लग गई थी जिसके चलते मिनिटो में पूरी दुकान जलकर खाक हो गई थी वो तो समय रहते इस आग पर काबू पा लिया गया नहीं तो आसपास के दुकानदारों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता। (फोटो संलग्र)
इस संबंध में हमारी जनप्रतिनिधियों से एवं संबंधित अधिकारियों से यह विनम्र अपील है कि इन खतरनाक गोदामोंं को सुरक्षित क्षेत्र में स्थापित कराकर रहवासी क्षेत्र में होने वाली दुर्घटनाओं का बचाव करें क्योकि अगर ऐसे ही प्रशासन आँख बंद कर कर बैठा रहेगा तो फिर कोई भीषण दुर्घटना होगी।

Monday, July 5, 2010

महंगाई विरोधी बंद शांतिपूर्ण रूप से सफल हुआ

















पुलिस अधीक्षक द्वारा सफल नेतृत्व के कारण कोई अप्रिय घटना नहीं हुई घटित
नगरवासियों द्वारा बंद को पूर्ण समर्थन दिया गया
(पिंकी उपाध्याय)





सिवनी-:५ जुलाई केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोलियम पदार्थाे की मूल्य वृद्धि के विरोध में विपक्ष द्वारा कराये गये बंद को सिवनी में पूर्ण रूप से समर्थन दिया गया इस बंद का आव्हृान भाजपा, माक्र्सवादी कम्यूनिष्ट पार्टी और जनता दल यूनाईटेड एवं सहयोगी दलों द्वारा किया गया था जिसे नगर में बस ऑपरेटर संघ, जिला ड्रग्स एसोसिएशन द्वारा सहयोग प्रदान किया गया।
सुबह ९ बजे से ही बंद समर्थकों ने एकत्रित होना चालू कर दिया था किंतु पुलिस अधीक्षक श्री रमनसिंह सिकरवार द्वारा पहले ही कोई अप्रिय घटना न हो इसीलिये पुलिस की समुचित व्यवस्था कर ली गई थी एवं श्री सिकरवार स्वयं ही इसका नेतृत्व कर रहे थे अधिकतर व्यापारियों द्वारा पूर्व ही बिना किसी विरोध के दुकाने बंद कर ली गई थी एवं जो छुट-पुट दुकाने खुली थी उन्होनें बिना किसी विरोध के दुकाने बंद कर इस आंदोलन को अपना समर्थन प्रदान किया और तो और पेट्रोल पंप भी दोपहर लगभग ३ बजे तक बंद रहे जिसके चलते कई वाहन चालक अपना वाहन पैदल घसीटते पाये गये इस बंद के चलते यह हवा उड़ गई थी कि नैनपुर जाने वाली रेल को रोका जायेगा किंतु एडीशनल एसपी श्री डहेरिया जी के नेतृत्व में यहां पर पुलिस की इतनी बढिय़ा व्यवस्था की गई की कोई भी आंदोलनकारी दल चाह कर भी कुछ नहीं कर पाया कुल मिलाकर इस बंद में आमजनता द्वारा बंद को पहले से ही स्वीकृति दी जा चुकी थी प्रशासनिक दफ्तरो में भी कामकाज ठप्प रहा इस बंद में पुलिस अधीक्षक डॉ. रमनसिंह सिकरवार के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन की भूमिका सराहनीय थी।